विंबलडन में खिताब जीतकर समीर बनर्जी ने भारतीय खून का लोहा मनवाया

नई दिल्ली। ग्रैंड स्लैम के सबसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट यानी विंबलडन में खिताब जीतकर भारतीय मूल के एक बच्चे ने धूम मचा दी है। इंडो अमेरिकन टेनिस प्लेयर समीर बनर्जी ने न सिर्फ विंबलडन में बॉयज़ सिंगल्स का खिताब अपने नाम कर लिया बल्कि लिएंडर पेस और युकी भामरी के शानदार प्रदर्शन के एक दशक बाद बाद ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट में भारत का नाम रोशन कर दिया। वैसे विंबलडन में किसी भारतीय के खिताब जीतने का अंतिम मौका सुमित नागल और सानिया मिर्जा को मिला था जब उन्होंने 2015 में अपने-अपने वर्ग में युगल का टाइटल अपने नाम किया था। 

आंकड़े बताते हैं कि 17 साल के समीर ने वह काम किया है जो किसी भारतीय मूल के बच्चे के लिए निश्चित ही गौरव की बात होगी। भारतीय टेनिस खिलाड़ी युकी भांबरी किसी ग्रैंड स्लैम में जूनियर एकल खिताब जीतने वाले आखिरी भारतीय लड़के थे। युकी ने 2009 में ऑस्ट्रेलियन ओपन में जीत हासिल की थी।  इस लिस्ट में अगला नाम सुमित नागल का है। उन्होंने 2015 में वियतनाम के ली होआंग के साथ विंबलडन बॉयज डबल्स स्पर्धा जीती थी। उसी साल सानिया मिर्जा ने दो ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट में महिला डबल्स में खिताब जीतकर भारत का परचम लहराया था। बता दें कि रामनाथन कृष्णन 1954 की जूनियर विंबलडन चैंपियनशिप जीतने वाले पहले भारतीय थे। उनके बेटे रमेश कृष्णन ने 1970 का जूनियर विंबलडन और जूनियर फ्रेंच ओपन का खिताब जीता। इसके बाद लिएंडर पेस ने 1990 में जूनियर विंबलडन और जूनियर यूएस ओपन टूर्नामेट जीता था।

रोचक है कि भारतीय मूल के अमेरिकी समीर बनर्जी ने अपने करियर के दूसरे ही ग्रैंड स्लैम मुकाबले में खिताबी जीत दर्ज कर ली। महज 17 साल के किशोर समीर की चाहत थी कि वो इस जीत को हासिल कर सकें। इस जज़्बे ने हॉलिडे ग्रास कोर्ट में इन क़दमों को तब तक डटे रहने की हिम्मत दी जब तक वो चैम्पियन नहीं बन गए। अपने ही देश के विक्टर लिलोव के खिलाफ खेलते हुए युवा समीर ने धुआंधार परफॉर्मेंस दिखाई। कोर्ट में राइवल विक्टर के साथ एक घंटा 22 मिनट के मैच में उन्होंने 7-5, 6-3 से इस जीत को अपने पाले में कर लिया। इस मुक़ाबले में उन्होंने केवल एक सर्विस मिस की जबकि विक्टर लिलोव को ऐसे तीन अवसरों का सामना करना पड़ा। 

अपनी जीत पर ख़ुशी का इज़हार करते हुए समीर बनर्जी ने जो कहा वो उनके भारतीय मूल के होने का प्रमाण देता है। उन्होंने कहा, ‘मैं वास्तव में नहीं जानता था कि इस ग्रास कोर्ट पर कैसे बेहतर खेलना होगा और अपना बेस्ट प्रदर्शन करने के लिए मैं अंदर आना चाहता था।’ अपनी इस जीत पर उत्साहित समीर के शब्द थे – ‘यह आश्चर्यजनक है कि मैं अच्छा खेलने में सक्षम हूं।’

विंबलडन और यूएस ओपन के एकल क्वार्टर फाइनल में पहुंचने वाले 67 वर्षीय भारतीय टेनिस खिलाड़ी विजय अमृतराज ने  इस मौके पर समीर बनर्जी को बधाई दी। अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने लिखा – ‘इंडो -अमेरिकी 17 वर्षीय समीर बनर्जी के लिए विंबलडन 2021 में लड़कों के सिंगल में शानदार जीत। उनके अच्छे भविष्य की कामना करता हूं।’

भारत में टैलेट है, इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं

समीर की उपलब्धि ने साबित कर दिया है कि भारतीय खून में खिताबी प्रदर्शन करने का जज्बा और टैलेंट दोनो है। लेकिन, वह इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है जो टैलेंट को खिताब तक पहुंचा सके। नतीजा है कि भारत पिछले कई वर्ष से जूनियर ग्रैंड स्लैम में एक योग्य दावेदार को उतारने के लिए संघर्ष कर रहा है। दूसरी ओर, समीर बनर्जी के हुनर को निखारने में अमेरिकी टेनिस एसोसिएशन का खासा योगदान रहा। एक मजबूत घरेलू सर्किट की कमी और विश्व रैंकिंग अंक अर्जित करने के लिए डोमेस्टिक स्तर पर पर्याप्त प्रतिस्पर्धा नहीं होने के कारण कई योग्य भारतीय खिलाड़ी खिताब की ख्वाहिश रखने के बावजूद अपने प्रतिद्वंदी से टक्कर नहीं ले पा रहे। 

पूर्वोत्तर से पिता और दक्षिण भारत से हैं समीर की मांसमीर बनर्जी के पिता का जन्म पूर्वोत्तर के असम में हुआ था और उनकी मां दक्षिण भारत के आंध्र प्रदेश से हैं। ये दोनों 1980 के दशक के मध्य में अमेरिका चले गए और वहीं शादी कर ली। समीर का इरादा अपनी पढ़ाई पर भी फोकस करना है। समीर कोलंबिया यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स या पॉलिटकल साइंस में डिग्री लेना चाहते हैं। इसके रजिस्ट्रेशन के लिए वह टेनिस सर्किट टूर से छुट्टी लेंगे।

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